शनिवार, 29 नवंबर 2008
कब तक
अंधाधुंध गोलियों की बौछार से आज तो मै और मेरा परिवार बच गया लेकिन कल का क्या भरोसा ---आख़िर बकरे की मां कब तक खैर मनाएगी कब तक हम एक आशंका भरी ज़िन्दगी मैं पल पल मर मर कर जीते रहेंगे --सभी को महानगरों मैं रहना है ---काम पर भी जाना है ---और खास दर्द को धोते हुए जाना है की आज लोटे या नही ?---देश के जावन शहीद हो रहे थे आतंक से लड़ कर और दूसरी तरफ़ देश के कलम्गर पत्रकार और फोटो ग्राफर अपनी अपनी कामयाबी के झंडे गद रहे थे बड़ा ही दयनीय लग रहा था एक पत्रकार ने तो उसे असली रियलिटी शो का नाम भी दे दिया और अपनी पेशकश पर बड़ा खुश भी हुआ होगा ---लेकिन मेरा मन तो वित्रश्ना से भर गया ---साहित्य मैं एक रस है करूँ रस जिसने केथार्सिस का सिधांत लागु होता है यानि जब हम करून रस को भी आस्वाद ले कर देखते हैं ठीक इसी तरह लग रहा था जब हम असहनीय दृश्यों को भी चर्चा कर कर के देख देख रहे थे --और ख़ुद को महिमामंडित कर बड़े ही संवेदनशील समझ रहे थे की भाई हमने तो एक मिनिटे के लिए भी टी.वि । बंद नही किया ---लेकिन सोचो कबीर ने कहा है ------जगत चबेना कल का कुछ मुख मैं कुछ गोद ---इस पंक्ति का अर्थ अब हो गया है ----भारत चबेना आंतंक का कुछ मुख मैं कुछ गोद ---और भी कहा आज नही तो कल तुम सबकी बार आही जायेगी आख़िर बकरे की मां कब तक खैर मनाएगी ------ फूली फूली चुन लई कलः हमारी बार ---इस पंक्ति की भी ध्वनी बदलआखि r वारूद के ढेर पर बैठ कर कोई कब तक बच पायेगा -----मेरा एतराज़ सिर्फ़ ये है की हम अपने शहीदों की मौत को शहादत को भी सुचना मात्र मैं न बदल देन ये एक जघन्य अपराध होगा -----आख़िर ये न्यूज़ चैनल कहाँ तक जायेंगे कल को तो ये युध का भी लाइव कवरेज़ करेंगे ---आखि इनकी उर्जा खुफिया तंत्र मैं क्यों नही लगती क्यों ये दोसरों की तवाही का जश्न का मन कर अपने झंडे गड़ना चाहते हैं इन्हे अपने कम पर गर्व नही घराना होनी चाहिए क्या पहले जब शहादत को टेलेकास्ट नही किया गया तब वीरों का आदर देस्गह ने नही किया ---और मैं तो यहाँ तक मानती हूँ की ये लोग ही आतंकियों को उकसाने का भी अपराध करते हैं और ऐसा जघन्य अपराध जिसकी सज़ा भी कोई इन्हें नही देता शायद इनके न्यूज़ परोसने ढंग को देख कर दुश्मन नै से नै आतंकी योजनायें बनते है और इन्हें फ़िर एक कवरेज़ का मौका मिल जाता है कोई तो इस ब्लॉग को पढ़े और शहादत का लाइव टेलेकास्ट रोके ----अमल्य और महान शहादत इनके ओछे लफ्जों से मैली न हो मेरे देश के वीरों की आत्मा को मेरा प्रणाम ---वो हमें अपनी नुमायश के लिए क्षम्मा करें ----भारत और भारत बासियों को सदबुधि मिले मेरे देश को अपरिपक्वा पत्रकारों के बचकाने अपराधों कोई बचाए और हम आतक की लडाई समझदारी और सूझ बुझ से लड़ें ---जय हिंद
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