प्रभु की कृपा का अनुभव करने के लिए भी प्रभु की कृपा का ही आसरा लेना ज़रूरी है --ये बड़ी विडम्बना है प्रभु जो कोई दर्द जानते ही नही हैं या जान कर भी जानना नही चाहते क्योंकिधर्मवीर भारती ने लिखा भी है -
तुम क्याजानोगे ओ !प्रभु उन गत्यवरोधों का दर्द
तुमने कब झेली संक्रांति /कैसे तरुनाई मैं ही घुट मर जाते हैं विश्वास /प्राणों की समिधायें जम कर हो जाती हैं सर्द
सो ऐसे प्रभु से उम्मीद न रखो जो आंसुओं का कुछ ज्यादा ही सस्ता भावः लगाते हों औरजिन्हें मनाने को पूरा जीवन भी कम पड़ता हो फ़िर भी जैसे उडि जहाज को पंछी फ़िर जहाज पर आवे उसी तरह की दशा है कि 'जाऊं कहाँ तजि चरण तिहारे 'सो प्रतीक्षा ही प्रतीक्षा है आगे उसकी इच्छा है सो कबहुँकमातअवसर सुधि भी हमारी सुधि भी कथाहमारीकहीं कोई hamari भी सुधि दिला सके क्योंकि prabhu को to विश्वास ही नही आता होगा की कोई tirepan sal bitakar भी ऐसा rita होगा की ख़ुद से नफरत हो जाए zindagi इस मोड़ पर aajaye की न जिया जाए न mra जाए सो इस नरक सेबचने का कोई sadhan to dhundhna ही पड़ेगा aaspas to ऐसी duniya है की मन vyakul रहता है ----prabhu sharan का ही aasara है क्योंकि zindagi ने zab chuaa tab fasla रख कर chhuaa------zindagi का गीत कुछ इस तरह कठिन था की किसी को समझ नही आया सो एक ankahi dastaan को leker ही jahan से kuunch करना होगा इसलिए prabhu को manana बहुत ही ज़रूरी हो गया है ------तुम janat सब antaryami karni kachu न करी अब मेरी rakho laz hari ----
शुक्रवार, 5 सितंबर 2008
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें