अं
क्या ये हमारा ही देश है ?
राहुल दुल्हनिया ले जायेगा ----- क्यों न ले जाये राहुल एक नयी दुल्हनिया चुन कर जब हमारी बेटियां बिंदास बाज़ार मैं खड़ीं हैं बेझिझक
हर शर्त मानने को आतुर --और हों भी क्यों न उन्हें ये सुन्दर भविष्य चुनने के लिए उनके माँ बाप ने दही पड़े खिला कर भेजा है -----कहा है जा बेटी हमारे यहाँ टी सावित्री ने भी अपना वर खुद ही चुना था ---सीता का भी स्वयंबर हुआ था ---और फिर ये तो नया ज़माना है हर आदमी अपना भविष्यबना रहा है
तो तुम क्या किसी से काम हो ---अरे हमारे ज़लवे लोग देखते ही रह जायेंगे की देखो उनकी बेटी ने रातोंरात कितनी शोहरत कमाई है कितने बड़े खंडन कज बहु बन गयी जिसमें नए ज़माने की साडी खूबियाँ हैं जो अपने ही भाई को भी नए ज़माने के उसूलों पार बलिदान कर सकते हैं कल तुम्हारा नाम भी उस महान खंडन से जुड़ जायेगा तो तुम भी रातोंरात मशहूर हो जाओगी ---------कोरे आदर्शों को क्या ओढें क्या बिछाएं हम लोग ---न बेटी बिंदास जाओ --और अपनी किस्मत की लकीरों को चमकाओ ---दोनों हाथ लड्डू रहेंगे इस खेल मैं हर गयीं तो लोक्प्रिता मैएगी ही मिलेगी और जित गयीं तो वारे न्यारे हैं ही --------
क्या सोच रही हो लाओ आज से ही मैं तुम्हारी साडी तयारी करवा देती हूँ ---------चलो अभी बाज़ार चलो ------यूँ गुमनाम रहने से किसी को कुछ नहीं मिलता है भाई अरे कुछ पाने के लिए तो कुछ कारना ही पड़ता है ------अब वो ज़माना लड़ गया जाब माँ बाप अपनी बेटियों की शील की सदाचार की दुहाई दे दे कर उन्हें ये कह कर मरने के लिए छोड़ देते थे की जा बेटी हमारी लाज तेरे हाथ है ---जिस घर मैं तेरी डोली जाये वहां से अर्थी ही उठे ---और बेटियां भी हँसते हँसते ससुराल की बलि बेदी पार शहीद हो कर माँ बाप का सर गर्व से ऊँचा करती थी ----------अब तो ये सब पशन कल की बातें लगती हैं अरे हम इक्कीसवी सदी के दस साल आगे आ चुके हैं ---चिता मत कर जा और बेधड़क जा ---चिड़िया की आँख की तरह अपने लक्ष्य पार अर्जुन का सा निशाना साध ----अरे हाँ देख १मैने और तेरे पापा ने भी फिनाल के लिए कपडे तयार करवा लिए हैं देखना ----व्याज समेत हमारी लगत निकल आयर ज़रा ध्यान रखना ---मेरे सिखाये गुर याद रहींगे न ----अरे राहुल तो भावुक सा बेवफा सा लड़का है उसे पटना तो तेरे बाएं हाथ का खेल है ---और फिर मेरी दुआएं भी तो हैं न तेरे साथ ---अरे अब जाएगी तो अरबपति बन कर ही लोतेगी ---फिर सब कहेंगे ---राहुल दुल्हनिया ले आया ---नए भारत के माहौल मैं एक अजीब सी महक अं ----ततो अं -------मैं का का से पानी पानी हुई जा रही होंगी की हाय हम शर्म न करते तो ये चांस तो न गँवा पाते ----कोई बात नहीं ----राहुल कि सीज़न २ कि ही लिस्ट ka
शुक्रवार, 12 फ़रवरी 2010
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3 टिप्पणियां:
meri raay me ees tarah ke reality shows ko band kardiya jana chahiye, ye shows na keval hamare samaaj ke vicharose viruddh hai, balki samaaj me galat sandesh bhi dete hai.
kahneko to ye REALITY SHOW hai par lagta ye koe screept ki tarah hai.
Kal Rakhi thi aaj Rahul hai kal shayad Bobby Darling ho.. kya pata ye channel wale apne TRP ke liye kuchh bhi kar sakte hai
बढिया पोस्ट है। आज प्रश्न चरित्र का नहीं है केवल प्रसिद्धि का है। इस प्रसिद्धि के लिए कुछ भी करना पड़े तो करो। यदि माता-पिता किसी लड़की के लिए उससे 15 वर्ष बड़ा दूल्हा पसन्द कर लें तो लड़कियों पर अत्याचार हो रहा है यह घोषणा होने लगती है लेकिन यहाँ तो लड़कियां स्वैच्छा से आ रही हैं। उनका मकसद भी विवाह नहीं है बस प्रसिद्ध होना है जिससे उन्हें आगे काम मिलता रहे।
har kisi ko life ki TRP badhani hai..chahe iske liye kuch bhi chukana pade..prabhavi prastuti!
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