जन लोकपाल के बहाने
सारा देश एक नयी सुबह का साक्षी बना पुर सुकून अंदाज़ मैं सांस ले रहा है ----सब लोगों के साथ मेरा विश्वास भी लौट आया है की ---अरे ये क्या !
हम तो एक जिंदा समाज मैं सांस ले रहे हैं वर्ना कई सालों से लग रहा था की सब खत्म हो गया ---कहीं कोई चिंगारी नहीं बची ---भला होअन्ना का जिस ने डूबती कश्ती को किनारे की आस बंधा दी -----मैं भी एक निजी स्वार्थ वश ये बात कह रही हूँ ----कल तक मुझे लगता था की सब अंग्रेजी ही बोलते हैं ---और अंग्रेजी ही समझते हैं ---लेकिन एक सुखद बयार में मेरा भी भरम तोड़ दिया -----
अचानक देखा की सब जन लोकपाल कह रहे हैं हर जाती हर वर्ग का हर उम्र हर तबके का आदमी सिर्फ और सिर्फ जनलोकपाल ही कह रहा है -----यही नहीं बड़े बड़े शब्द हिंदी के ही बोले जा रहे हैं -----शुद्ध आचार ---शुद्ध विचार ----त्याग --अपमान सहने की शक्ति -----अनशन -----संघर्ष -----जैसेकठिन और नीरस समझे जाने वाले हिंदी के शब्द जनता और नेता दोनों की जवान प़र आये ----तो सुकून इस वात हुआ की चाहे मानें या न मानें हिंदी लोगों की जबान प़र आसानी से चढ़ गयी है ----महात्मा गाँधी ने गुजरती भाषी होते हुए भी हिंदी को अपने आन्दोलन की भाषा बनाया ----इसी तरह आदरणीय अन्ना जी ने भी मराठी भाषी होते हुए भी हिंदी को अपने आन्दोलन का अलंकर बनाया ---अब तो माँ ही लेना होगा की हिंदी जन जन का कंठहार है ---जय हिंदी ----जय भारत
सारा देश एक नयी सुबह का साक्षी बना पुर सुकून अंदाज़ मैं सांस ले रहा है ----सब लोगों के साथ मेरा विश्वास भी लौट आया है की ---अरे ये क्या !
हम तो एक जिंदा समाज मैं सांस ले रहे हैं वर्ना कई सालों से लग रहा था की सब खत्म हो गया ---कहीं कोई चिंगारी नहीं बची ---भला होअन्ना का जिस ने डूबती कश्ती को किनारे की आस बंधा दी -----मैं भी एक निजी स्वार्थ वश ये बात कह रही हूँ ----कल तक मुझे लगता था की सब अंग्रेजी ही बोलते हैं ---और अंग्रेजी ही समझते हैं ---लेकिन एक सुखद बयार में मेरा भी भरम तोड़ दिया -----
अचानक देखा की सब जन लोकपाल कह रहे हैं हर जाती हर वर्ग का हर उम्र हर तबके का आदमी सिर्फ और सिर्फ जनलोकपाल ही कह रहा है -----यही नहीं बड़े बड़े शब्द हिंदी के ही बोले जा रहे हैं -----शुद्ध आचार ---शुद्ध विचार ----त्याग --अपमान सहने की शक्ति -----अनशन -----संघर्ष -----जैसेकठिन और नीरस समझे जाने वाले हिंदी के शब्द जनता और नेता दोनों की जवान प़र आये ----तो सुकून इस वात हुआ की चाहे मानें या न मानें हिंदी लोगों की जबान प़र आसानी से चढ़ गयी है ----महात्मा गाँधी ने गुजरती भाषी होते हुए भी हिंदी को अपने आन्दोलन की भाषा बनाया ----इसी तरह आदरणीय अन्ना जी ने भी मराठी भाषी होते हुए भी हिंदी को अपने आन्दोलन का अलंकर बनाया ---अब तो माँ ही लेना होगा की हिंदी जन जन का कंठहार है ---जय हिंदी ----जय भारत
5 टिप्पणियां:
सार्थक अभिव्यक्ति बहुत कम शब्दों में अपने अपनी पूरी बात कह डाली बहुत खूब समय मिले कभी तो आयेगा मेरी पोस्ट पर आपका स्वागत है
http://mhare-anubhav.blogspot.com/
अपनी मातृभाषा के समान कोई भाषा नहीं हो सकती .... हिंदी का मान सदा बना रहे
भला होअन्ना का जिस ने डूबती कश्ती को किनारे की आस बंधा दी ...bilkul sahi kaha aapne..
bahut badiya sarthak aalekh..
prastuti hetu dhanyavad.
sadar!
मेडम आपके ब्लॉग पर बहुत अच्छा लगा। आप लोग तो साहित्यकार हो। मजा आना ही था। बधाई। आप मेरे मूल अलसी के ब्लॉग पर भी जायें। मुझे आच्छा लगेगा।http://flaxindia.blogspot.in/
आपका
डॉ. ओम वर्मा
बहुत ही सुंदर और सार्थक लेख।
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