मंगलवार, 22 अप्रैल 2008
chhanv
chattan ki chaanv main guzarti zindagi bhi khoobsoorat ho sakti hai basharte ki tmhara zine ka aandaaz zara hat kar ho .zaroori nahi ki chaav bhi tumhari pasand ki ho chaanv hai yahi kya kam hai ;zo mila wo aukat se zyada hai aur aisi chhanv ka kuch alag hi maza hai ---------sukh wahi achha zo dukh ki chashani main lipta hirahe sukh nahi sukh ka fusion yaani aabhas bana rahe
मंगलवार, 15 अप्रैल 2008
yashoda ka krish prem

कृष्ण को मैं कभी यशोदा की आंखों से देख पाउंगी क्या ?यशोदा जैसा दुग्ध धवल मॅन पा सकूंगी क्या ?बड़ा ही मन होता है यशोदा के कृष्ण प्रेम से भरे मॅन मैं झाकने का.मुझे लगता है की यशोदा पूरे समय अपना मॅन ही मथती रही जब होगी .दही मथने का तो मानों बहाना था म्मन्न को मैथ मैथ कर ऐक एक भाब को कृष्ण मय बनाने का संकल्प लिएजब यशोदा दही मथती होगी वह माखन कृष्ण को भाता होगा इसी लिए कृष्ण माखन चोर बन गया होगा सोचता होगा सबके माखन मैं ऐसा ही रस होगा .और ये भी तो सच है की कृष्ण की माँ यशोदा ऐसी मुग्ध मनः दशा इसलिए रहती हो अंतर्मन मैं उसे पता हो की कृष्ण को तो एक दिन जाना ही है .मन ही मन इस आंच से उद्वेलित हो कर जो यशोदा का कृष्ण वात्सल्य उमदा है उसे अगर एक घड़ी या आधी घड़ी भी जी सकूं तो समझूंगी की जीवन एक पल जिया .यशोदा के मॅन के कृष्ण विरह को जी सकने के लिए तो बड़ी तपस्या की ज़रूरत है प्राण निकलते हैं इस पंक्ति पर जब यशोदा कहती है ''है कोई ब्रिज मैं हितु हमारौ चालत गोपलाही रखीवाह री कृष्ण मात यशोदा धन्य हो तुम
- कृष्ण मात यशोदा '
kripamai
कल आज और कल; से मिल बना कर जीवन को जीते टू हैं लेकिन सुनियोजित तरीके से न जी पाने का अफ़सोस होता है
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