
कृष्ण को मैं कभी यशोदा की आंखों से देख पाउंगी क्या ?यशोदा जैसा दुग्ध धवल मॅन पा सकूंगी क्या ?बड़ा ही मन होता है यशोदा के कृष्ण प्रेम से भरे मॅन मैं झाकने का.मुझे लगता है की यशोदा पूरे समय अपना मॅन ही मथती रही जब होगी .दही मथने का तो मानों बहाना था म्मन्न को मैथ मैथ कर ऐक एक भाब को कृष्ण मय बनाने का संकल्प लिएजब यशोदा दही मथती होगी वह माखन कृष्ण को भाता होगा इसी लिए कृष्ण माखन चोर बन गया होगा सोचता होगा सबके माखन मैं ऐसा ही रस होगा .और ये भी तो सच है की कृष्ण की माँ यशोदा ऐसी मुग्ध मनः दशा इसलिए रहती हो अंतर्मन मैं उसे पता हो की कृष्ण को तो एक दिन जाना ही है .मन ही मन इस आंच से उद्वेलित हो कर जो यशोदा का कृष्ण वात्सल्य उमदा है उसे अगर एक घड़ी या आधी घड़ी भी जी सकूं तो समझूंगी की जीवन एक पल जिया .यशोदा के मॅन के कृष्ण विरह को जी सकने के लिए तो बड़ी तपस्या की ज़रूरत है प्राण निकलते हैं इस पंक्ति पर जब यशोदा कहती है ''है कोई ब्रिज मैं हितु हमारौ चालत गोपलाही रखीवाह री कृष्ण मात यशोदा धन्य हो तुम
- कृष्ण मात यशोदा '
3 टिप्पणियां:
bahut hi achchha likha hai mummy.
Jai Shree Krishna! Maataa Yashodaa aur Baalaka Shree Krishna kaa prayma yugon yugon tak smarndiya rahaygaa. Maataa kaa pad uskaa hee hai jo maataa jaisaa vyavhaaraa karay. Laykhaka nay is bhaava ko bakhoobhee vivaychana kiyaa hai.
Bahuta bahuta dhanyawaada!
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